जब जंगल के बड़े क्षेत्रों को जानवरों के लिए अभयारण्य घोषित कर दिया जाता है और बड़े बांधों का निर्माण किया जाता है तो हजारों लोग विस्थापित होते है । पूरे के पूरे गांव के लोगों को अपनी जड़ों को छोड़कर कही और नए घर बनाने और नई जिंदगी आरम्भ करने के लिए मजबूर कर दिया जाता हैं।
इन विस्थापितो में से अधिकांश लोग गरीब होते है । उन्हें हटा दिया जाता है। इनमे से कुछ को शहर के बाहरी इलाकों में दुबारा बसाया जाता है ये गरीब शहरो में स्लम इलाकों में बसते है जहाँ इन लोगों को मूलभूत सुविधाओं* भी नही मिल पाती है । जहाँ से इन्हें हटाया गया ये लोग वहाँ पर अपनी जीविका चलने के लिये काम -धंधे में लगे होते है परंतु विस्थापित होने और पलायन के बाद बड़े शहर में ये अपना व्यवसाय *स्थापित करने में असफल रहते है और गंदे काम या छोटे काम करने पर मजबूर हो जाते है और अब परिवार के सभी सदस्यों को जीवन बचाने औऱ बच्चों का पेट भरने के लिये काम करना पड़ता है। बच्चे गांव में स्वाभिमान से शिक्षा ग्रहण *कर रहे होते है क्योंकि वह गांव में सभी बच्चों और लोगों से परिचित है और गांव में परिवार में पिता के कमाई से गुजरा हो जाता है तो परिवार की महिला सदस्य बच्चों की देखभाल करती है l Humdard
परन्तु शहर में परिवार के सभी सदस्यो को काम पर जाना पड़ता है तो बच्चों के देखभाल के लिए कोई नही रहता है बच्चों पर इसका बहुत असर पड़ता है। तथा स्लम में या तो स्कूल का अभाव होता है या होते भी है तो गांव बच्चे शहर के बच्चों के साथ स्वाभाविक रूप से शिक्षा ग्रहण *नही कर पाते है तथा वहाँ स्कूल छोड़ देते है। कई परिस्थितियों में तो बच्चों को भी बाल मज़दूरी करनी पड़ती है ।
लोगों और समुदायों का विस्थापन हमारे देश मे एक बड़ी समस्या का रूप ले चुका है।
ऐसे में कई बार लोग संगठित होकर इसके विरुद्ध लड़ाई के लिए सामने आते है देश मे ऐसे बहुत -से संगठन है जो विस्थापितों के हक की लड़ाई लड़ रहे है ।
UPSC, MPPSC, OTHERS PSC,COMPITITIVE EXAM AND SCHOOL STUDENT
तवा मत्स्य संघ
छिंदवाड़ा जिले की महादेव पहाड़ियों से निकलने वाली तवा नदी, होशंगाबाद में नर्मदा से मिलने के लिए बैतूल होते हुई आती है । तवा पर एक बांध का निर्माण 1958 में आरंभ हुआ और उसके 1978 में पूरा हुआ । जंगल के बड़े हिस्से के साथ ही बहुत -सी कृषि भूमि भी बांध में डूब गई, जिससे जंगलों के निवासी अपना सब कुछ खो बैठे ।इनमें से कुछ विस्थापितों ने बांध के आस पास रहकर थोड़ी बहुत खेती के अलावा मछली पकड़ने का व्यवसाय आंरभ किया । यह सब कुछ करके भी वे थोड़ा सा कमा पाते थे।
1994 में सरकार ने तवा बांध के क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम निजी ठेकेदारों को सौप दिया । इन ठेकेदारो ने स्थानीय लोगों को काम से अलग कर दिया और बाहरी क्षेत्र से सस्ते श्रमिकों को ले आए । ठेकेदारों ने गुंडे बुलाकर गांव वालों को धमकियां देना भी आरम्भ कर दिया, क्योकी लोग वहां से हटने को तैयार नही थे । गांव वालों ने एकजुट होकर तय किया कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिये लड़ने ओर संघटन बनाकर सामने खड़े होने का वक़्त आ गया
नवगठित 'तवा मत्स्य संघ' ने सरकार से मांग की लोगों के जीवन निर्वाह के लिए बांध में मछलिया पकड़ने के काम को जारी रखने की अनुमति दी जाए। यहाँ माँग करते हुए 'चक्का जाम' शुरू किया गया। उनके प्रतिरोध को देखकर सरकार के पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की। समिति ने गांव वालों के जीवनयापन के लिए उनको मछली पकड़ने का अधिकार देने की अनुशंसा की।
1996 में मछली पकड़ने का अधिकार यहाँ के विस्थापितों को ही दिया जायेगा। इस तरह विस्थापित गरीब की हिम्मत रंग लाई ओर उन्होंने पलायन की समस्या नही झेलनी पड़ी । और स्थानीय क्षेत्र में ही रोजगार प्राप्त हो गया । वो अपना जीवन अपने क्षेत्र में पूरे स्वाभिमान के साथ जी सके।
तवा मत्स्य संघ के साथ जुड़कर मछुआरों के लगातार अपनी आय में इजाफा दर्ज किया। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योकि वह सब संगठित हुआ और सहकारी समिति बनाई ।सरकार ने इस समिति को तवा बांध में मछली पकड़ने के लिए पांच वर्ष का पट्टा (लीज) देना स्वीकार कर लिया।
Facebook link - Click herehttps://testbk.co/z1y98
प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण Naukri Job
* स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 19 (f) - कोई भी व्यापार या कारोबार करने का अधिकार ।
अनुच्छेद 21 - प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 21(A) - 86 वे संवैधानिक संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा जोड़ा गया
प्रावधान - 14 वर्ष की उम्र तक नि शुल्क शिक्षा का अधिकार
* शोषण के विरुद्ध अधिकार
अनुच्छेद 23 - बलात श्रम का निषेध
अनुच्छेद 24 - कारखानो आदि में बच्चों के नियोजन का प्रतिषेध
* सहकारी समिति - 97 वा संविधान संशोधन अधिनियम के द्वारा जोड़ा गया
स्थिति- भाग 9 खंड ब (B)